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बुधवार, 9 मई 2012
चन्द पंक्तियां...
चंद पंक्तियां...
बुधवार, 2 मई 2012
चन्द पंक्तियां...
चन्द पंक्तियां...
मंगलवार, 27 मार्च 2012
दिल से निकली पंक्तियां..
मैं अक्सर देर से उठता हूँ, वो सुबह जल्दी निकलता है।"
"मैनें खुद के लिए खुदा से मांगना ही छोड़ दिया है,
जब से उसने किसी और से चाहत की बात कही है।"
"वो मुझसे पूछता है, ख्वाब किस किस के देखते हो,
बेखबर जानता ही नही, यादें उसकी सोने कहाँ देती हैं!"
"मुस्कुराने से भी होता है बयां गम-ए-दिल,
मुझे रोने की आदत हो ये जरुरी तो नहीं..।"
"तुझसे बुरा दुनिया मे कोई नहीं है इश्क,
हर भले को बिगाड़ने का काम किया तूने।"
"हमें अच्छा नहीं लगता, कोई हम-नाम तेरा,
कोई हो तुझसा, तो फिर नाम तुम्हारा रखे।"
"जब भी सोचता हूँ तेरे बिना क्या है मेरी जिन्दगी,
एक उजड़े हुए गुलिस्तां का मंजर याद आता है।"
"ख्वाहिशों का काफीला भी अजीब ही होता है,
अक्सर वहीं से गुजरता है जहां रास्ते नहीं होते।"
"तुम जो इजाजत दो तो चंद लफ्जों में कह डालें,
कि तुम बिन मर तो सकते हैं, पर जी नहीं सकते।"
"ये लफ्जों की शरारत है, जरा संभल कर लिखना तुम,
मोहब्बत लफ्ज भर है लेकिन, ये अक्सर हो भी जाती है।"
"जिन्दगी तो मेरे जन्म के पहले से ही खूबसूरत है,
मेरी कोशिश तो इसे और बेहतर बनाने की है...।"
"मंजिलों का गम करने से मंजिलें नहीं मिला करती,
हौसले भी टूट जाते हैं, अक्सर उदास रहने से...।"
"जो तुम्हें देख के फिर और किसी के देखे,
वो एक तमाशाई है तलब-ए-दीदार नहीं...।"
"ये मैं ही था, बचा के खुद को ले आया कनारे तक,
वर्ना, समंदर ने बहुत मौका दिया था डूब जाने का।"
"बहुत मुश्किल है कोई लगाये मेरी चाहतों का अंदाजा,
कि मेरी चाहतों का समंदर उनकी सोच से भी गहरा है..।"
"मैं काबिल-ए-नफरत हूँ तो छोड़ दे मुझको,
तू मुझसे यूं दिखावे की मोहब्बत न किया कर..।"
"तुझसे रुठने के बहाने तो बहुत हैं मगर,
डरता हूँ गर मनाने न आया तो क्या करेंगे।"
"उसकी मोहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब सिलसिला था,
अपना भी नहीं बनाया और किसी का होने भी नहीं दिया...।"
"अल्फाज इन्सान के गुलाम होते हैं, मगर बोलने से पहले ।
बोलने के बाद इन्सान लफ्जों का गुलाम बन जाता है ।।"
"सफर तो है मेरा, रफ्तार मगर तुम हो।
न होते तुम तो शायद तेज दौड़ता,
या किसी ठौर पर रुक ही जाता...।"
"उनकी शिकायत है की मैं तारीफ नहीं करता,
कैसे कहूं की अब मैं सच बोलने लगा हूँ...।"
"वाह रे दुनिया की साफगोई,
दीवारो को रंगों में बांटा, और
इंसानो को मजहबों के फेर में..."
"मत छोड़ मेरा साथ तू जिंदगी में इस तरह, दोस्त
शायद हम जिंदा हैं तुम्हारे ही साथ रहने से..."
"यह विसंगति जिंदगी के द्वार सौ-सौ बार रोई....
चाह में है और कोई...बांह में है और कोई...."
"मरना तो इस जहान में कोई हादसा नहीं,
इस दौर-ए-नागवारी में जीना कमाल है...।”"
"जिन राहों पे एक उमर तेरे साथ रहा हूँ,
कुछ रोज से वो रास्ते सुनसान बहुत हैं..."
"अबकी वो बिछड़ेगा तो ये इल्तजा करुंगे उससे,
बिन अपने जीने का कोई अंदाज तो सिखाता जा..."
"वो कहती रहीं हर बार, मेरी मुस्कुराट कमाल है..
सच ही कह रही थीं शायद, तभी तो
आज जाते हुए, साथ सिर्फ मेरी मुस्कुराहट ले गयी।"
"काश ! वो सुबह नींद से जागे तो मुझसे लड़ने आये,
कि तुम कौन होते है मेरे ख्वाबों में आने वाले।"
"गैरों को कब फुरसत है गम देने की,
जब होता है कोई हमदम होता है।"
"बर्बाद बस्तियों में किसे ढ़ूढ़ते हो तुम,
उजड़े हुए लोगों के ठिकाने नहीं होते।"
"
"कफन पड़ा तन पे तो ये मालूम हुआ,
कि लोग परदा नशीनों को इतना चाहते क्यों हैं।"
"कैसी खामोशी है इन लम्हों में,
जैसे सारे रंग उड़ चले हैं जिन्दगी के हमारे।"
"मैं इस लिए भी अक्सर अपनी ख्वाहिशों को मार देता हूँ,
कि मुझे वो नहीं मिला करता जो ख्वाहिश बन जाता है।"
"आसां नहीं आबाद करना घर मोहब्बत का,
ये उनका काम है जो जिन्दगी बरबाद करते हैं।"
"आजकल सूरज से बहुत कम मेरी आंख मिलती है।
रात जागते बीत जाती है, दिन आंखों खोलने में गुजरती है।"
"जगी है प्यास ऐसी की, समन्दर भी कम लग रहा।
पर मुकद्दर ऐसा है, कि जहर भी नहीं मिल रहा।।"
गुरुवार, 24 नवंबर 2011
शायरी......
“हम उन्हें वो हमें, एक दूजे की गलतियों पर इल्जाम देते हैं मगर,
अपने अंदर झांकने का हौसला वो भी नहीं रखते, हम भी नहीं...।”
“मेरी मज़ार पर ख्वाहिशों का इतना सार लिख देना,
कि एक शख्स जिन्दगी की हसरत में मर गया...।”
“किसी से क्या गिला करना इस जहान में,
शायद हम ही याद के काबिल नहीं रहे।”
“शहर वाले सजाते हैं, हर झूठ पर रिश्तों के आशियानें,
और हमें पछताना पड़ा है अपने पहले ही झूठे बयान पर।”
"नींद से मेरा ताल्लुक ही नहीं बरसों से, फिर
ख्वाब आ-आ कर मेरे छत पर टहलते क्यों हैं..."
“आज आईने में अपनी भी सूरत ना पहचानी गयी,
आंसुओं ने आंख का हर अक्श धुंधला कर दिया।”
“मैं एक खिलौना हॅू, और वो उस बच्चे की तरह है,
जिसे प्यार है मुझसे, पर सिर्फ खेलने की हद तक।”
“तुम्हें मालूम है जाना कि तुम भी एक कातिल हो,
मेरे अंदर का हंसता हुआ इंसान तुमने मार डाला है।”
“सूरज को जागने में जरा देर क्या हुई,
चिड़ियों ने आसमान ही सर पर उठा लिया।”
“आज कल मिलती है हमें बहुत कम फुरसत,
रात सोने में गुजरती है, दिन उठने में है जाता।”
"नींद आये तो ख्वाबों का मुकद्दर भी हो रोशन,
जब नींद ही नहीं है, तो फिर ख्वाब कहां के...।"
“हवा परेशान है कि आज उसने जुल्फों को क्यों नहीं समेटा
शायद उसकी ज़िन्दगी आज जुल्फों से ज्यादा उलझ गयी है....”
“खुबसूरत क्या कह दिया उनको, हमको छोड़ कर वे शीशे के हो गए,
तराशा नही था तो पत्थर थे, तराश दिया तो खुदा हो गए ....”\
“हम गलत कुछ नहीं करते हैं,
हम तो ज़माने के साथ चलते हैं।”
“मोहलत तो दे मुझे कुछ... ऐ-वक़्त के मुसाफिर,
तेरी ही यादों से हैं मेरी तकदीर की तस्वीर,
यूँ तो सारा जहाँ हैं खजाने में मेरे,
बस तू ही नहीं मेरे हम-दम ...... मेरे रकीब.....”
“एक ना तमाम ख्वाब मुकम्मल न हो सके,
आने को जिंदगी में बहुत इंकलाब आये...।“
“मंदिर में फूल चडाने गया तो अहसास हुआ की....
पत्थरो की ख़ुशी के लिये फुलोंका कत्ल कर आये हम ...
मिटाने गये थे पाप जंहा... वहीं एक और पाप कर आये हम.....”
“चेहरे अजनबी हो भी जायें तो कोई बात नहीं लेकिन,
रवैये अजनबी हो जाये तो बड़ी तकलीफ देते हैं...।”
"मैं जो चाहू तो अभी तोड़ लू नाता तुमसे,
पर मैं बुजदिल हूँ, मुझे मौत से डर लगता है।"
“है मिजाज अपना परिंदा, आवारगी-ए-आलम अपना शौक,
पर एक उनकी ख्वाहिश ने, मेरी उड़ान को पाबंद कर दिया...”
“बेताब दिल का हाल खुद-ब-खुद जाहिर हो जाता है,
जब भी जरा सा जिक्र उस नाम का हो उठता है...।”
"बदला हुआ है आज मेरे आंसुओं का रंग,
फिर दिल के जख्म़ का कोई टांका उधड़ गया..."
"किसी का ना समझना भी हमे बहुत दर्द देता है,
बस जो सामने दिखाई न दे उसे लोग माना नहीं करते..."
“तेरी सूरत पर मुझे कभी नाज ना था,
कमबकत तेरी सीरत ने दगा दे दिया....”
“अफवाह कभी दिल-ए-हालात बता नहीं सकते,
जो जाननी हो तबियत तो हमसे मिलते रहा करो...”
“बीज तब ही बोना जब ज़मीन को परख लेना,
हर एक मिट्टी की फितरत में वफादारी नहीं होती।”
“इश्क का टुटा वो इमां बेच आया ...
खुदा के डर वो बचपन बेच आया ...
मंगलवार, 9 अगस्त 2011
कुछ जज्बात...
"दिल-ओ-नज़र से कुछ देर भी जुदा रखूं,
ये मेरे बस मैं नहीं की तुझे खफा रखूं !
नहीं है कुछ भी मेरे ज़ेहन में सिवा इसके,
मैं तेरी याद भुला दूँ तो याद क्या रखूं !!"
"टुकड़ों में जी रहे हैं, जीने की चाह में हम,
महंगा पड़ा है शायद ये ज़िन्दगी का शौक..
सादगी है ये की दिल कहता है सबको अपना,
मुझको मिटा न डाले कहीं ये दोस्ती का शौक..."
"जो आजमाते हैं उन्हें भी ये पता चले,
हम साथ में लिये हुए किस की दुआ चले।
ख्वाहिश है या खलिश है या कोई खुमार है,
तू न दिखा तो हम जुस्तजू-ए-तन्हाई चले..।।"
"सब बलाएँ रोज मेरी अपने सर लेती रही
माँ ही थी जो सह के सब कुछ भी दुआ देती रही
उसके दम पर आ अंधेरों आज भी रोशन हूँ मैं
मेरी बुझती लौ को माँ हर दिन हवा देती रही........"
"आवारा मिजाजी से निकलने नहीं देता ,
मैं चाहूँ बदलना वो बदलने नहीं देता ,
ना जाने कैसा उसकी दोस्ती में है नशा ,
एक उम्र हुई मुझको संभलने नहीं देता...."
"खताए उसकी आज उसको बता आये हम,
आँखों के मोती को आँखों से गिरा आये हम,
कहते ही क्या उस इश्क के व्यापारी को भला,
दिखा के आईना नजरो से गिरा आये हम...."
"हम से बिछड़ कर बेनाम हो जाओगे,
सौदागरों के हाथो नीलाम हो जाओगे,
हमें अच्छा नहीं लगता तेरा हर एक से मिलना,
हर किसी से मिलोगे तो आम हो जाओगे..! "
"कुछ फासले सिर्फ आँखों से होते हैं,
दिल के फासले तो बातों से होते हैं,
कोई लाख भुलाने कि कोशिश करे पर,
कुछ रिश्ते ख़त्म सिर्फ साँसों से होते हैं..!"
"क़सम उन मस्त आँखों कि,
मै वो लबरेज सागर हूँ,
जो मस्ती में चल निकलूँ,
तो सारी दुनियां को ले डूबूं.."