रविवार, 24 जुलाई 2011

"माना की बहुत खास हूँ में अपने चाहने वालो के लिए लेकिन ...
चंद लम्हों से ज्यादा कोई न रोयेगा मेरे चले जाने के बाद ..."
"सुकून दिन को , रात को राहत नहीं है ,
मुझे फिर भी उनसे शिकायत नहीं है ,
मै हक उसपे अपना जताऊ भी तो कैसे,
वो चाहत है मेरी अमानत नहीं है..."

‎"जिस मासूमियत से मैंने अपने ज़ख्म दिखाए थे ,
उतनी ही मेहरबानी की उसने उन्हें नासूर बनाने में ..."
"तुमसे न कट सकेगा अंधेरों का ये सफ़र ,
अब रात हो रही है मेरा हाथ थाम लो ..."
"मैं बिखरा नही हूँ, बस थोडा टूट गया हूँ !
मैं खफा भी नही, बस थोडा रूठ गया हूँ !
मत सोच के मैंने चाहा है तेरा साथ छोड़ना !
तू आगे निकल गया और मैं पीछे छुट गया हूँ !!"

"मेरे न रहने से किसी को कोई खास फरक नहीं पड़ेगा,
बस एक तन्हाई रोएगी की मेरा हमसफ़र चला गया..."

"फ़रिश्ते से बेहतर है इंसान बनना..
मगर उसमे लगती है मेहनत ज्यादा...."
"आरम्भ के स्तर से
विकास के शिखर तक,
यह क्रम सब जीवन में फिरते हैं....

पर मौत उस सच्चाई
को नहीं नापती,
जहाँ से हम गिरते हैं....."
"एक ठंडी हवा, एक बादल, एक खूबसूरत आसमान...
मैं जहाँ कहीं भी जाता हूं , अपने घर की धुल साथ ले जाता हूँ..."

"फुर्सत ही नहीं मिली कभी मुझको दिल लगाने की ...
इसलिए ये मोहब्बतों के मुद्दे मेरी समझ में नहीं आते ..."

खलीश मन की...

"बेनाम सा ये दर्द, ठहर क्यों नहीं जाता,
जो बीत गया है, वो गुज़र क्यों नहीं जता,

वो एक ही चेहरा तो नहीं, सारे जहां में,
जो दूर है, वो दिल से उतर क्यों नहीं जाता,

मैं अपनी ही उलझी हुई, राहों का तमाशा,
जाते हैं जिधर सब, मै उधर क्यों नहीं जाता,

वो नाम जो बरसो से, ना चेहरा ना बदन है,
वो ख्वाब अगर है, तो बिखर क्यों नहीं जाता...."
"खो गया यादों के हुजूम में अपना ही वजूद ,
कि अब याद नहीं किस याद ने महफूज रखा था..."
"तुझे अकेले पढूँ कोई हम-सबक न रहे ,
मैं चाहता हूँ की तुझ पर किसी का हक न रहे .."

इक बात कहूं गर सुनते हो ..

इक बात कहूं गर सुनते हो .
तुम मुझको अच्छे लगते हो .
कुछ चुप - चुप से , कुछ चंचल से ,
कुछ पागल - पागल लगते हो .

हैं चाहने वाले और बहुत ,
...पर तुम में है इक बात अजब ,
तुम मेरे सपने से लगते हो.
इन ख्वाबों से आगे बढ़कर .
तुम अपने अपने से लगते हो .

इक बात कहूं गर सुनते हो .
तुम मुझको अच्छे लगते हो .
"उसे मालूम है शायद मेरा दिल है निशाने पर ,
लबों से कुछ नहीं कहती नज़र से वार करती है,
मैं उससे पूछता हूँ ख्वाब में , 'मुझ से मोहब्बत है ?
फिर आँखें खोल देता हूँ वो जब इज़हार करती है ''
‎"Lamhon mein qaid kar de jo sadiyon ki chahate
Hasrat rahi ki aisa koi apna bhi talabgaar ho..!!"
वक्त और लहरें किसी का इंतजार नहीं करतीं। एक न एक दिन हम सबको आखिरी नतीजों का सामना करना ही पड़ता है। मुस्कुराते हुए इसका सामना करने की तैयारी करना बेहतरी है।
‎"हमारा दिमाग, इस दुनिया में सबसे बड़ा धोखेबाज़ है! यह अपने रास्ते चलने के लिए अलग-अलग तरह के हज़ारों बहाने करता है!"
‎"गली गली मैं हुआ मेरी हार का ऐलान ,
ये कौन जाने की मैं तो बिसात पर ही न था "
"वो जो औरों को बताता है जीने के तरीके ...
खुद अपनी मुट्ठी में मेरी जान लिए फिरता है ......"

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