रविवार, 24 जुलाई 2011

"मैं रोजमर्रा के अनुभवों में, होशमंद हालत में, यूं ही भटकता हूं ... महसूस करता हूं कि जैसे कोई जहाज हूं जो परिस्थितियों के समंदर में है ..."
"हमे भी पता है साहिल का सुकून, लेकिन
लुफ्त हमे सागर से टकराने में आता है.."
"मुखालफत से मेरी शख्सियत निखरती है ,
मैं दुश्मनों का बड़ा एहतराम करता हूँ ! "
‎"शिद्दत-ए-दर्द से शर्मिंदा नहीं है मेरी वफ़ा ... !
दोस्त गहरे हैं तो फिर जख्म भी गहरे होंगे !!"
“Wo Chup Rehta Tha Magar, Uski Nighahen Bolti Thi...
kuch Log khamosh Reh Kar Bhi “DIL” Jeet Jaatey Hain...!”
‎"शायद कोई ख्वाहिश रोती रहती है,
मेरे अंदर बारिश होती रहती है।
रोज सजाता हूँ ख्वाबों का कारवां,
हकीकत मेरी आंखों को धोती रहती है।"
"जो छू नहीं सकते, जमीं की सहजता,
उन्हें अधिकार नहीं है, आकाश छूने का ...."
राहें सदा असंतोष से निकलती हैं, संतोष के गढ़ से कोई भी राह बाहर की ओर नहीं जाती। मैं भी असंतोष के दौर में हूँ और अपने मंजिल को उन्मुख मेरा सफ़र लगातार जारी है।
‎"नहीं काबिल तेरे लेकिन, मुनासिब हो अगर समझो,
याद रखना दुआओं में, यही बस इल्तजा अपनी ....!"
‎"हवाओं ने है रुख बदला, तूफां की गुंजाइश है ...
जिद अपनी भी न रुकने की, आज हौसलों की आजमाईश है !"
‎"पलकों की हद को तोड़ कर बाहर वो आ गया,
एक आंसू मेरे सब्र की तौहीन कर गया....!"
‎"ज़िन्दगी के मेले में, मैंने बस यही देखा ,
इक दुकान सपनों की, इक हुजूम दुनिया का..."

मैं..

‘‘तुम जैसा समझते रहे वैसा तो नहीं मैं,
कांटा हूँ मगर फूल पे चुभता तो नहीं मैं!

अपनों से तो रूठा हूँ मैं सौ बार बहरहाल,
पर गैरों में जाकर कभी बैठा तो नहीं मैं!

रोता है अब भी दिल मेरा अक्सर ये सोचकर,
भूला हैं मुझे वो, उसे भूला तो नहीं मैं!

खुद्दारी की कुछ दाद तो तुम्ही दो मेरी आँखों,
हालात तो रोने के थे रोया तो नहीं मैं! "
किसी की तकलीफों का जिम्मेदार नहीं है "आकाश ".. ,
फिर भी लोग मुसीबतों में मेरी तरफ क्यों देखेते हैं ...!'
‎"Mera kissa...Meri Zindagi...Meri Hasraton Ke Siwa Kuch Nahi,
Ye Kiya Nahi, Wo Hua Nahi, 'Ye' Mila Nahi, 'Wo' Raha Nahi !!!"
‎" एहसास तो कर इन जज्बों का, नजरों से गिरा बेशक लेकिन!
जीना भी मुझे दुश्वार लगे, इतना तो नजर अंदाज़ ना कर....!! "
‎"कभी सुना था की ज़िन्दगी हौसलों से कटती है, आज पता चला 'मरने की आरज़ू' और 'सिसकती साँसों' को भी लोग जीना कहते हैं...!"
‎"लगातार प्रयास और अपनी गलतियों से सीख कर हर किसी को सही कदम उठाना ही पड़ेगा क्योंकि किसी की भी जिंदगी इतनी लंबी नहीं होती वह 'चाणक्य' बनने तक की अवधि का इंतज़ार कर सके!"
"सोचता हूँ बिना शर्त के आये मौत तो हाथ मिला लूं ,
कि उब्ब गया हूँ ज़िन्दगी से समझौता करते-करते...."
‎"टुकड़ों में जी रहे हैं, जीने की चाह में हम,
महंगा पड़ा है शायद ये ज़िन्दगी का शौक..
सादगी है ये की दिल कहता है सबको अपना,
मुझको मिटा न डाले कहीं ये दोस्ती का शौक..."

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